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YOU DESERVE A AWESOME PORTRAIT !!
Introducing Parag Arts. Get a wonderful portrait of yourself or for your loved ones by me :) . A perfect gift to present someone which t...
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Monday, June 14, 2021
Monday, January 23, 2017
Monday, November 14, 2016
Wednesday, October 5, 2016
Saturday, October 1, 2016
Friday, March 11, 2016
Tuesday, April 1, 2014
Wednesday, October 2, 2013
॥ लाल बहादुर शास्त्री जी और महात्मा गाँधी जयंती ॥
आज इन दो महापुरूषों का जन्मदिन हैं। अत्यन्त स्वाभिमानी और सादगी उनके अनेक गुणों में से कुछ गुण थे । पुरानी धोती , स्वयं ही सारे कार्य करना , बैंक में चंद रुपये आदि जैसी चीज़े शायद ही किसी राष्ट्रपति में देखने को मिलती होगी । पाकिस्तान से युद्ध के समय उन्होंने अमेरिका से आनाज(गेंहूँ) लेने को मना कर दिया और देश वासियों से रामलीला मैदान में अनुरोध किया की वें हर सोमवार व्रत करें और फालतू खर्च कम कर दें ताकि पैसे देश के काम आ सकें । इसे उन्होंने अपनी निजी जीवन में भी उतार । फल स्वरुप देश में गेंहूँ उत्पादन बड गया। ऐसे स्वाभिमानी थे शास्त्री जी और हम भी ऐसा ही होना चाहिए।
बापू जी ने हमेशा स्वदेशी वस्तुओं कों प्रोत्साहन दिया । वे स्वयं चरखा चलाते थे । आजकल लोग और सरकार केवल खादी को ही ज्यादा प्रोत्साहन देतें है और उसे ही एकमात्र स्वदेशी वस्तु मानती हैं । तब केवल एक east India company लूटती थी और अब ५००० से ज्यादा कंपनियां हमें लूट रहीं हैं।
स्वदेशी आन्दोलन को आजकल लोग केवल बाज़ार के उत्पाद से ही जोडती जबकि स्वदेशी का अर्थ है अपनी जीवन की दिन चर्या में अपनी संस्कृति से सीखी हुई चीज़ों का अनुपालन करना । इसका अर्थ है की केवल 20 kilometer के दायरे में उगने वाली वनस्पतियों का सेवन करना। खुद के बनाई हुई या लघु उद्योग के चीज़ें खरीदना जिससे देश का पैसा देश में ही बड़े।
हम सब आज से स्वदेशी का पालन करें और अपने आप को और देश को सशक्त करें ।
स्वदेशी के बारें में विस्तार से जानने के लिए श्री राजीव जी (http://www.bharatswabhimansamachar.in/rajiv-dixit/) को अवश्य सुने |
जय भारत
Friday, August 9, 2013
Sunday, June 9, 2013
Sunday, May 5, 2013
ब्रह्मा
इस नव वर्ष २०७० (चैत्र शुक्ल पक्ष) की बहुत शुभ कामनाएं ।
थोडा विलम्ब से पोस्ट किया (क्षमाप्रार्थी)।
यहाँ चित्र मेने अनिरुद्ध (http://molee.deviantart.com/) की कलाकृति को देखकर बनाया है |
Monday, April 22, 2013
Saturday, October 20, 2012
Sunday, October 7, 2012
गौ
|| श्री गोभ्यः नमः ||
गाय पृथ्वी की सर्वश्रेष्ठ प्राणी है जो किसी भी खाद्य वस्तु को अमृत में परिवर्तित करती है ।
गोबर , दूध और गौमूत्र प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रूप से वह वायु और उर्जा शुद्ध करती है ।बैलों की सुगंद मात्र से कई रोगों का क्षय होता है । अतः इसका स्थान मनुष्यों से भी उपर है ।
प्राचीन भारत की धर्म और अर्थ व्यवस्था गौ पर ही निर्भर थी । घरों में फर्श लेपने और खाना पकाने से लेकर औषधियों और कृषि भूमि से लेकर वाहन के रूप में गौ की भूमिका सर्वोपरि रही है । गौ पालन एवं सेवा व्यर्थ के भोगो से बचाती है और संतुष्ठता प्रदान करती है जिससे गौ पालक चरित्रवान और सेवानिष्ट होता है अतः वह समाज के प्रति जागरूक और सही मार्ग को प्रकाशित करने वाला होता है अतः गौ धर्म अर्थ काम मोक्षदायिनी है ।
आधुनिक स्थिति में मानव गौ को ही भूल चुका है । प्रत्यक्ष देवता को न पूज के मूर्तियों और ढोंग में फंसा है । यह जानना आवश्यक है प्रकृति में उपलब्ध वस्तुएं ही वास्तविक देवता (वृक्ष , जलाशय , मेघ , पर्वत , प्राणी , पंचभूत , उर्जा एवं गौ ) है। इन कृतियों का शोषण और मलीन करना प्राकर्तिक आपदाओं को निमंत्रण देना है ।
भारत का प्रत्येक नागरिक अगर गौ प्रेमी हो और वह अपना कुछ समय और आय का भाग गौ वर्धन में नियोजित करे तो इस देश का और उस गौ प्रेमी का उठान सुनिश्चित है ।
"यह सारी पृथ्वी गौधरा(गौ के रहेने और चरने का स्थान) है "
"आप गाय को कोई नहीं पालते अपितु गाय आपको पालती है "
" प्रकृति में सभी समस्यों का निवारण करने में केवल गौ ही समर्थ है "
|| वन्दे धेनुमातरम् ||
Wednesday, August 1, 2012
Sunday, March 4, 2012
Tuesday, February 14, 2012
Thursday, January 19, 2012
Friday, December 23, 2011
Saturday, December 17, 2011
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